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Why Gynecologist Avoid Normal Delivery & force for Operation ( surgery)




#National_issue🇮🇳

क्या हम भारतीय महिलाएं कमजोर  बना रहे हैं

     क्या हम महिलाओं के साहस को तोड़ रहे हैं

1) असली डिलीवरी डेट से 10--15 दिन पहले की डेट को डिलीवरी डेट  बताते है और लेट होने पर डराते है के सीज़ेरियन ऑपरेशन करने को

2) यदि फिर भी गर्भवती महिला रुककर नार्मल डिलेवरी का इंतज़ार करती है और असली डेट पर उसे लेबर पेन्स उसने शुरू होते है तब अस्पताल जाने पर उसे तुरंत लेबर कम करने का इंजेक्शन लगाया जाता है ताकि उसे डरा धमका फुसला कर ऑपरेशन कर के मोटी रकम वसूल की जा सके।

यूरोप में डिलीवरी के समय उस औरत का पति उसके पास होता है और कमरे में एक या दो नर्सें होते हैं किसी तरह की दवा नहीं दी जाती औरत दर्द की वजह से चीखती चिल्लाती है मगर नर्स उसे सब्र करने का कहती है और 99% डिलीवरी नार्मल की जाती है ना डिलीवरी से पहले दवा दी जाती है और ना बाद में किसी किस्म का टीका भी नहीं लगाया जाता औरत को हौसला होता है कि उसका पति उसके पास खड़ा हुआ है उसका हाथ पकड़े हुए हैं।

डिलीवरी के बाद बच्चे की नाफ कैंची से उस औरत का पति ही काटता है और बच्चे को औरत के जिस्म से डायरेक्ट बगैर कपड़े के लगाया जाता है


New born Baby with mother

Baby by operation not good for mother's health

ताकि बच्चा टेंपरेचर मेंटेन कर ले बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलाने को कहा जाता है और मा बच्चा दोनों को किसी किस्म की दवाई नहीं दी जाती बस एक सुरक्षा टीका जो पैदाइश के फौरन बाद बच्चे को लगाया जाता है पहले दिन से बच्चे की पैदाइश तक सब फ्री होता है और डिलीवरी के फौरन बाद बच्चे की परवरिश के पैसे मिलने शुरू हो जाते हैं।

लेकिन सभी देशों में ऐसा नहीं है भारत में लेडी डॉक्टर डिलीवरी के लिए आती हैं और औरत के घरवालों से पहले ही कह देती हैं कि आपकी बेटी बहन या पत्नी कि पहली प्रेगनेंसी है उसका काफी केस खराब है  पहले और बाद में झोली भर भर कर दवाइयां दी जाती हैं डिलीवरी के वक्त औरत का पति तो दूर की बात है औरत के माँ या बहन को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं होती और अंदर डॉक्टर उसकी नर्स क्या करती हैं यह तो रब जाने या तो वह खातून जाने जो अंदर होती है।

नॉर्मल डिलीवरी में 20 से 30000 और ऑपरेशन वाली डिलीवरी में ₹70000 से 80000 ₹ चले जाते हैं कौन सा डॉक्टर चाहेगा कि उसके हाथ से यह रुपये जाएं नॉर्मल डिलीवरी जानबूझकर नहीं कराई जाती किस डॉक्टर का दिमाग खराब है कि नॉर्मल की तरफ ले जाए आखिर उसको भी तो नोट कमाना है बच्चों को बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ाना है महंगी गाड़ियां लेनी है बड़ा घर बनाना है इंसानियत से  क्या लेना इनका तो पैसा ही धर्म होता है और वही इनका सब कुछ होता है।


नोट : इस मे कुछ आँकड़े या बातें गलत हो सकतीं हैं लेकिन मौजूदा दौर में डॉक्टरों से किसी भी तरह की इंसानी हमदर्दी मात्र कुछ % ही रखी जा सकती है।

To be Continued...✍️ Pankaj Pathania

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